कुत्तों में कुत्ता
रोहन लपक के बोला, “तो बोल देता मूंह पे उसके कि किसी और से करवा लो, मेरे को बोहोत काम है।”
“अब यहां क्या रोना रो रहा है”
मेरा मूंह छोटा सा होके रह गया। कई बार कोशिश कर चुका हूं कि मदद मांगनेवालों को बोल दूं कि मैंने ठेका नहीं लिया है, जाके किसी और से पूछो। पर लोगों के सामने खुदगर्जी नहीं दिखा पाता। रोहन भी इसीलिए जब देखो सबके सामने फजीती कर देता है। एक तो साले की लड़की से बात करवाई, सारे कोर्स असाइनमेंट किये, डेट्स के लिए जगहें ढूंढी। रात भर जब ये कॉलेज में घूम रहा होता था, तो मैं कमरे पे पिला पड़ा रहता था ताकि ये इश्क़ लड़ा ले। वाह बेटा, अब मेरा सबके सामने मज़ाक बना रहा है।
“भाई, जा ना, गाइड से मिलना नहीं है क्या?”, वो आधा समोसा मुँह में रखे चिल्ला रहा था।
मेरे अंदर जैसे आग लग गई। कब तक रौब झाड़ता रहेगा। हमेशा डीओ लगा के निकलता है, साबुन भी देख के लेगा की खुशबू वाला खरीदे। लोगों के सामने हीरो बनेगा और हॉस्टल में जाते ही इसके तेवर बदल जाते हैं। मेरे कमरे पर आके रोना रोयेगा की उसने आज झिड़की देदी, एग्जाम ख़राब हुआ, इंटर्न करनी है, खाना नहीं खाया और क्या क्या। तभी दो तीन लोग उसकी किसी दूसरी बात पे हंस दिए।
मैंने बहुत ही काइंये सी आवाज़ में बोला, “तू बड़ा उछल रहा है। सुबह तो रो रहा था कि वो जा रही है, और तेरा रिसर्च का काम बचा हुआ है। अब क्या हुआ तेरे दर्द को?”
“इत्ती आग लग रही है तो जल्दी से पूरा कर ले काम।”
मुझे गुस्से और डर से काँपता देखके कुछ लोग तो मंडली में से खिसक लिए। जो लोग हम दोनों को जानते थे, सुलह कराने लगे।
खान बोला, “यार रिसर्च में तो सब मारे हुए हैं, क्यों लड़ रहे हो। आज खाने में दो रोटी ज्यादा खा लेना। यहाँ तमाशा मत करो। “
“तू बीच में मत पड़ यार, तुझे कुछ नहीं पता।”, मैं हाथ से उसे जाने का इशारा करते हुए बोला।
“ये रोज़ मुझे ज्ञान देता रहता है, कि मतलबी बनना सीख, लोगों पे इत्ता ध्यान मत दिया कर और खुद मेरा फ़ायदा उठाता है “, बोलते बोलते मुझे रोहन का चेहरा कुछ उतरता सा लगा, तो मैं और ज़ोर से चिल्लाने लगा, “साले तुम पार्टियों में जाओ, लौंडियाँ पटाओ, और हम यहाँ तुम्हारे बदले घिसते रहें। अबसे खुद करना सारे काम, अपना ख़तम!” और मैं तमतमाता हुआ निकल गया।
कुछ पांच-दस मीटर चला होऊंगा की एक कुत्ता पूँछ हिलाता हुआ आ गया। मुझे कुछ सूझा नहीं, और गुस्से में मैंने कुत्ते को एक लात लगा दी। कुत्ता पहले तो मिमियाता हुआ निकल गया, पर उसके पीछे-पीछे कोई 3-4 कुत्ते और आ गए। उनका भौंकना शुरू होने के बाद अब मैं सबकी नज़र में था। कुत्तों से मेरा प्रेम रोहन से मिलने के बाद ही बना था। रात में कभी वो होता था तो मैं निकल जाया करता था , वरना कुत्तों और मेरा छत्तीस का था। रोहन भी ये बात अच्छे से जानता था, पर वो हरामखोर फिर भी मदद के लिए नहीं आया।
थोड़ी दूर और चलने के बाद अब कहीं भी जाना मुश्किल था। इन कुत्तों की आवाज़ सुन कर दूसरे कुत्ते भी आ धमके। मैं वहां कभी तो पत्थर उठा के मारने का नाटक करता, तो कभी हाथ बांधकर खड़ा हो जाता जैसे कुछ नहीं हुआ। शायद बुद्धिजीवी होने का बहुत बड़ा नुकसान ये है कि लोगों कि नजर हमें कचोटती है, अपनी बदकिस्मती का एहसास दुगना हो जाता है। कसमसाते, हाथों की मुट्ठियां बनाते, मैं किसी तरह कुँए और खाई से बचता हुआ हॉस्टल आ गया।
हॉस्टल में आते ही आपकी ज़िन्दगी आपकी नहीं रह जाती। जिस भी कमरे में जाओ, लोग एक दूसरे कि इज्ज़त उतारने में लगे रहते हैं। तब इससे फरक नहीं पड़ता कि आपने क्या किया था, बल्कि आपके साथ क्या हुआ था। कॉलेज के लड़के होते भी बहुत हरामी हैं, अगर आपने गलती से भी किसी लड़की से कैंटीन में बात कर ली, या फिर अगर क्लास में आपने आज कुछ पूछ लिया, तो लोग आपकी जमकर रैगिंग लेंगे। हाँ हाँ , मैं जानता हूँ कि रैगिंग अब बंद कमरों के पीछे होती है, और हर सीनियर यही बोलता है कि नया बैच बहुत बिगड़ा हुआ है। पर मज़ाक उड़ानेवालों का कोई रिश्तेदार नहीं होता। मैं सिगरेट मांगने पास वाले कमरे में गया तो वहां पहले ही समां बंधा हुआ था। कुछ बीयर की बोतलें और खुल्ली ओसीबी पड़ी हुईं थी।
मैंने झूठा अपनापन दिखाते हुए बोला, “क्या यार सूखे सूखे? सुट्टा वुट्टा जलाओ। आज दारु वारु कैसे ला रखी है? गार्ड कुछ नहीं बोला?”
हमारे बैच का एक लड़का, जिसने बहुत पी रखी थी, बकने लगा “साले तू फट्टू है। तेरी गार्ड से फटती है, तेरी गाइड से फटती है, घरवालों से फटती है, लड़की पटाने का चांस था तेरपे इस साल, वहां भी तू कटवा के आ गया। साले तेरी ज़िन्दगी झंड है।”
दूसरा, एक और बैठा लड़का जिसका कमरा था, लड़खड़ाते हुए बोला, “अबे बैठ यार तू , मैं पेग बनाता हूँ तेरा ” मुफ्त की दारु मिलते देखके मैंने कुछ नहीं बोला, फिर भी लालची निगाहों से सिगरेट का सफ़ेद डिब्बा देखता रहा। उसपे लगी फोटो का घिनौनापन जब गले तक आ गया, तो मैंने ही उठ के सिगरेट जला ली।
मुझे शराब जल्दी चढ़ जाती है। कुछ ही देर में गाने मेरी पसंद के बजने लगे तो मैं थोड़ा ढीला पड़ गया, रोहन को बोली बात भी दिमाग से जाती रही। मैंने इसी बीच कुत्तों वाली बात का भी ज़िक्र कर दिया। मेरी पूरी बात सुनके पहले वाला लड़का बोलने लगा “आज ना तेरी सारी परेशानियां सही कर देंगे, तू बस मेरे साथ चल।”, और बोलते बोलते ही वो खड़ा हो गया। शराबियों वाला भाईचारा दिखाते हुए मैं भी बहक गया और उसे गुरु बोलते बोलते उसके साथ वापिस कॉफ़ी शॉप आ गया। शराब की गंध तो थी ही, पर मेरी चाल देखके कोई भी बता सकता था की मैं अभी पूरी तरह होश में नहीं हूँ। मेरी बदकिस्मती थी की वो लड़की जिसे मैं दूर से देखा करता थ , उसी समय लैब से वहां चाय पीने आ गई।
उसे देखकर मेरे साथ वाला लड़का ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा, “बोल दे आज तो दिल की बात, हो जाये वन-ऑन-वन।”
मैं शर्म और उसकी ऊँची आवाज़ से बेइज्जत होके कायर हो गया। उसकी बांह खींचते हुए मैं मना करने लगा, “यार आज नहीं, आज मन नहीं है “, “कित्ते लोग हैं यहाँ पे तो “, “ऐसे एकदम से बोलना अच्छा नहीं लगता”। पर वो मानने को तैयार ही नहीं था।
मैं जैसे ही उल्टा चलने को हुआ, वो ज़ोर से चिल्लाया “तू साले डरपोक ही रहेगा, बंदी पटाना तेरे बस का नहीं है। तू बस लोगों की जी-हुजूरी करता रह। कित्ती लड़कियों ने फ़्रैंडज़ोन किया है अभी तक?”
इतने में मेरा गाइड भी वहां चाय पीने आ गया। मुझे लगा कि अब तो ये रुकेगा, पर वो तो नशे में धुत्त था। वो फिर भौंकने लगा, “मेरको तो लगा था कि तू केवल झिझकता है, पर तू तो सही में फट्टू है। साले, बोलने का ही दम नहीं है, अग़र गर्लफ्रेंड बन भी गई तो क्या कर लेगा। मर्द बन साले, मर्द। ले मेरी बाइक की चाबी, घुमा के लाना, एकदम मस्त।”
वो और भी चीज़ें बड़बड़ाने लगा जिनका मैं आदी था। अब मुझे समझ आने लगा था कि वो मेरी नहीं बल्कि खुद की बात कर रहा था। वो भी तो मेरे जैसा ही है। उसी कमरे में दिन, महीनों, साल उसने भी गुज़ारे हैं। खाने में वही रबड़ रोटी और मसाले का पलीदा वो भी रोज़ खाता है। कल फिर सुबह उठके वो भी क्लास जायेगा, दिनभर पिदकर रजाई में घुस जायेगा। यही रुमानी ख्याल सोचते सोचते एकदम से मेरी नज़र मेरे गाइड पर पड़ी। निगाह इतनी पैनी कि मेरा खड़ा रहना हर घड़ी मुश्किल हुआ जाता। मैं अपने बड़बड़ाते दोस्त को वहां अकेला छोड़ निकला, पर सामने देखा तो वही पुराने कुत्ते किसी नए कुत्ते का भौंक-भौंक कर स्वागत कर रहे थे।

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